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IDBI Bank हिस्सेदारी बिक्री

IDBI Bank में 60.72% हिस्सेदारी Fairfax को बेचने को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी

केंद्र सरकार और LIC की IDBI Bank में कुल 60.72% हिस्सेदारी Fairfax Financial Holdings की एक सहायक कंपनी को बेचने की मंजूरी दी गई है। प्रस्तावित सौदे का मूल्य 52,878.08 करोड़ रुपये है।

IDBI Bank में 60.72% हिस्सेदारी Fairfax को बेचने को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी

IDBI Bank हिस्सेदारी बिक्री

Published by: cloudtv-newsroom
  • Posted:October 14, 2026 4:32 pm
  • Update:October 14, 2026 4:32 pm
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को IDBI Bank में सरकार और Life Insurance Corporation of India (LIC) की कुल 60.72% हिस्सेदारी Fairfax Financial Holdings की एक सहायक कंपनी को बेचने की मंजूरी दे दी। इस हिस्सेदारी की प्रस्तावित बिक्री का मूल्य 52,878.08 करोड़ रुपये है।

Fairfax को रणनीतिक खरीदार चुना गया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली Cabinet Committee on Economic Affairs (CCEA) ने Fairfax को IDBI Bank के लिए रणनीतिक खरीदार के रूप में मंजूरी दी। सौदे में सरकार की 30.48% और LIC की 30.24% हिस्सेदारी शामिल है।

सौदे के बाद सरकार और LIC की हिस्सेदारी

लेनदेन पूरा होने के बाद IDBI Bank में सरकार की हिस्सेदारी 15% और LIC की हिस्सेदारी 19% रह जाएगी। दोनों की संयुक्त हिस्सेदारी 34% होगी।

दो चरणों में हुई प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया

खरीदार के चयन के लिए सरकारी निकायों की निगरानी में दो चरणों वाली प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया अपनाई गई। इस प्रक्रिया में Inter-Ministerial Group, Core Group of Secretaries on Disinvestment और कैबिनेट मंत्रियों का एक अधिकार प्राप्त समूह शामिल था।

बैंकिंग क्षेत्र पर संभावित असर

वित्त मंत्रालय ने कहा कि इस निजीकरण से भारत के बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र पर महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। मंत्रालय के अनुसार, IDBI Bank सरकारी सहायता पर निर्भर हुए बिना धन जुटाने में सक्षम हो सकता है। रणनीतिक खरीदार से निजी पूंजी, नई तकनीक और बेहतर प्रबंधन प्रक्रियाएं आने की भी उम्मीद जताई गई है।

2022 में शुरू हुई थी बिक्री प्रक्रिया

IDBI Bank में हिस्सेदारी बिक्री की घोषणा पहली बार 2022 में की गई थी। मार्च में बोलियां सरकार की मूल्य अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरने के बाद प्रक्रिया रोक दी गई थी। इसके बाद नियामकीय और प्रक्रियागत देरी के बीच बिक्री प्रक्रिया आगे बढ़ी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस लेनदेन को भारत के वित्तीय क्षेत्र में सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बताया है।

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