Mamata Gyanesh Kumar arrest
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खोजी रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। बुधवार को तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भी चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप (Mamata Gyanesh Kumar arrest) लगाए।
ममता ने ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की। उन्होंने हाल में हुए चुनावों को रद्द कर पुरानी मतदाता सूची के आधार पर दोबारा चुनाव कराने की मांग भी रखी।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि Special Intensive Revision यानी SIR के जरिए मतदाता सूची में हेरफेर किया गया। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया और EVM को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने आयोग की कार्यप्रणाली में कथित रूप से मदद करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की।
हालांकि, ये ममता बनर्जी के राजनीतिक आरोप हैं। इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं रखा गया है। चुनाव आयोग ने इन आरोपों के संदर्भ में कहा है कि आयोग के सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
ममता ने अपनी दूसरी मांग में हाल में हुए चुनावों को रद्द करने और पुरानी मतदाता सूची के आधार पर फिर से चुनाव कराने की बात कही।
उन्होंने SIR के बाद जिन राज्यों में चुनाव हुए, वहां चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाया। उनका आरोप है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बाद उसी सूची के आधार पर चुनाव कराए गए।
इससे पहले शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में बैलेट के जरिए दोबारा चुनाव कराने की मांग की थी। आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने भी हालिया चुनावों और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
हालांकि, चुनाव रद्द करने और दोबारा चुनाव कराने से जुड़े फैसले कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होते हैं। पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़े कई मामले और मतदाता अपीलें फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया में हैं।
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की 23 सितंबर की जांच रिपोर्ट में कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार विभिन्न फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की।
रिपोर्ट में नए मतदाताओं को जोड़ने, नाम हटाने, Form 6 में बदलाव और मतदाता डेटा के प्रबंधन को लेकर आपत्तियों का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, मतदाता डेटा के नियंत्रण के धीरे-धीरे दिल्ली में केंद्रीकृत होने पर भी सवाल उठाए गए।
रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। ममता ने भी अपने बयान में चुनाव आयोग की IT व्यवस्था और अधिकारी सीमा खन्ना का जिक्र किया।
सीमा खन्ना को लेकर ममता पहले भी आरोप लगा चुकी हैं। SIR के दौरान उन्होंने आरोप लगाया था कि AI के इस्तेमाल से मतदाताओं के नाम हटाए गए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कहा कि आंतरिक विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय सामने आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग के अनुसार, SIR सहित पिछले एक साल के सभी अंतिम फैसले पूरे आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए।