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Haiwaan review

‘हैवान’ रिव्यू: प्रियदर्शन का डार्क अवतार, अक्षय-सैफ की कैट-एंड-माउस थ्रिलर को 3 स्टार

‘हैवान’ में प्रियदर्शन ने कॉमेडी से हटकर एक डार्क और खूनी कैट-एंड-माउस थ्रिलर पेश की है। अक्षय कुमार और सैफ अली खान की टक्कर फिल्म की बड़ी ताकत है, हालांकि 2016 की ‘ओप्पम’ की छाया से यह पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाती।

‘हैवान’ रिव्यू: प्रियदर्शन का डार्क अवतार, अक्षय-सैफ की कैट-एंड-माउस थ्रिलर को 3 स्टार

Haiwaan review

Published by: cloud_hindi
  • Posted:September 11, 2026 9:47 am
  • Update:September 11, 2026 9:47 am
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अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी को आमने-सामने रखकर निर्देशक प्रियदर्शन ने ‘हैवान’ में अपने परिचित कॉमेडी जोन से बिल्कुल अलग दुनिया बनाई है। फिल्म में बदला, हत्या, डर और लगातार पीछा करने का खेल है। यह 2016 की मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ का हिंदी रीमेक है, लेकिन प्रियदर्शन ने कहानी को मुंबई में शिफ्ट करते हुए इसे ज्यादा ग्लॉसी और बॉलीवुड-स्टाइल बनाने की कोशिश की है।

‘ओप्पम’ की कहानी, लेकिन मुंबई का नया माहौल

‘हैवान’ की मूल कहानी काफी हद तक ‘ओप्पम’ जैसी ही है। फर्क कहानी के ट्रीटमेंट, लोकेशन और मुख्य कलाकारों की स्टार इमेज में दिखाई देता है।

फिल्म में अक्षय कुमार परशुराम गोखले का किरदार निभाते हैं, जो एक ऐसे अपराध के लिए सात साल जेल में रहता है जो उसने नहीं किया था। जेल से बाहर आने के बाद वह उन लोगों से बदला लेने निकलता है जिन्हें वह अपनी जिंदगी बर्बाद करने के लिए जिम्मेदार मानता है।

उसके सामने आता है जन्म से दृष्टिहीन श्याम राणे, जिसका किरदार सैफ अली खान ने निभाया है। अपनी बेहद तेज सुनने और सूंघने की क्षमता के सहारे श्याम एक मासूम स्कूली बच्ची की रक्षा करने की कोशिश करता है।

अक्षय-सैफ की टक्कर फिल्म की सबसे बड़ी ताकत

अक्षय कुमार इस फिल्म में अपनी आम कॉमेडी वाली छवि से बिल्कुल अलग नजर आते हैं। परशुराम एक हिंसक और बदले की आग में जल रहा व्यक्ति है, जिसके भीतर पुराना गुस्सा लगातार बढ़ता जाता है।

सैफ अली खान के लिए भी यह असामान्य भूमिका है। जन्म से दृष्टिहीन श्याम कमजोर नहीं है। जरूरत पड़ने पर वह बेहद आक्रामक रक्षक बन जाता है।

मूल फिल्म में मोहनलाल के प्रदर्शन से तुलना होना स्वाभाविक है, लेकिन सैफ ने उनकी नकल करने की कोशिश नहीं की और किरदार को अपनी शैली में निभाया।

कॉमेडी के उस्ताद प्रियदर्शन ने चुना डार्क टोन

प्रियदर्शन की पहचान लंबे समय से कॉमेडी और हल्के-फुल्के मनोरंजन से रही है। लेकिन ‘हैवान’ में उन्होंने अंधेरे और हिंसक माहौल को प्राथमिकता दी है।

फिल्म में हत्या और खतरे का माहौल लगातार बना रहता है। हालांकि निर्देशक ने अपनी पुरानी शैली को पूरी तरह छोड़ा नहीं है। गंभीर दृश्यों के बीच कुछ हास्य के पल भी आते हैं, खासकर एक उम्रदराज सुरक्षा गार्ड का किरदार कुछ राहत देता है।

कहानी में बड़े सरप्राइज कम, तनाव बरकरार

अगर आपने ‘ओप्पम’ देखी है तो ‘हैवान’ के कई घटनाक्रम आपको पहले से पता हो सकते हैं। फिल्म की कहानी बहुत ज्यादा रहस्य छिपाकर नहीं चलती।

इसके बावजूद अक्षय और सैफ की भिड़ंत, बच्ची पर मंडराता खतरा और लगातार बढ़ता तनाव फिल्म को बांधे रखते हैं। प्रियदर्शन ने मूल कहानी को पूरी तरह बदलने के बजाय उसे बॉलीवुड दर्शकों के लिए ज्यादा भव्य और भावनात्मक बनाने की कोशिश की है।

बोमन ईरानी और सपोर्टिंग कास्ट का योगदान

बोमन ईरानी एक ऐसे जज की भूमिका में हैं जिसका अतीत परशुराम के बदले की कहानी से सीधे जुड़ा है। यही कड़ी पूरी कहानी को आगे बढ़ाती है।

सैयामी खेर पुलिस अधिकारी की भूमिका में हैं, जो श्याम के साथ जांच में जुड़ती हैं। श्रिया पिलगांवकर भी महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। फिल्म में मोहनलाल का स्पेशल कैमियो भी है।

फैसला: अच्छा थ्रिलर, लेकिन ‘ओप्पम’ की बराबरी मुश्किल

‘हैवान’ प्रियदर्शन के लिए एक महत्वपूर्ण जॉनर शिफ्ट है और अक्षय कुमार के लिए भी अपनी परिचित छवि से बाहर निकलने का मौका। सैफ का अभिनय, अंधेरा माहौल और दोनों सितारों की टक्कर फिल्म को देखने लायक बनाती है।

लेकिन ‘ओप्पम’ की छाया इससे पूरी तरह अलग नहीं हो पाती। कहानी में मौलिकता सीमित है और मूल फिल्म से तुलना स्वाभाविक रूप से होती रहती है।

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