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Mithu Mukherjee dies at 71

वरिष्ठ बंगाली अभिनेत्री मिथु मुखर्जी का निधन, 71 साल की उम्र में कैंसर से लंबी लड़ाई खत्म

वरिष्ठ बंगाली अभिनेत्री मिथु मुखर्जी का 71 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। लंबे समय तक कैंसर से जूझने के बाद मुंबई के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। ‘Marjina Abdulla’, ‘Mouchak’ और ‘Swayamsiddha’ जैसी फिल्मों से उन्होंने 1970 के दशक में पहचान बनाई थी।

वरिष्ठ बंगाली अभिनेत्री मिथु मुखर्जी का निधन, 71 साल की उम्र में कैंसर से लंबी लड़ाई खत्म

Mithu Mukherjee dies at 71

Published by: cloud_hindi
  • Posted:September 21, 2026 7:49 am
  • Update:September 21, 2026 7:49 am
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वरिष्ठ बंगाली अभिनेत्री मिथु मुखर्जी का निधन हो गया है। लंबे समय तक कैंसर से जूझने के बाद रविवार रात मुंबई के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वह 71 वर्ष की थीं।

मिथु मुखर्जी 1970 के दशक में बंगाली सिनेमा की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल थीं। अपनी खूबसूरती, अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस के कारण उन्होंने उस दौर में दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई थी। बाद के वर्षों में उन्होंने सार्वजनिक जीवन से दूरी बना ली थी।

‘Shesh Parba’ से शुरू हुआ फिल्मी सफर

मिथु मुखर्जी ने चित्त बोस की फिल्म ‘Shesh Parba’ से बड़े पर्दे पर कदम रखा। 1972 में आई इस फिल्म के बाद बंगाली सिनेमा में उनका करियर आगे बढ़ा।

हालांकि, उन्हें बड़ी पहचान 1973 में दीनन गुप्ता की फिल्म ‘Marjina Abdulla’ से मिली। फिल्म में उन्होंने शीर्षक भूमिका निभाई थी और अपने अभिनय से दर्शकों का ध्यान खींचा।

इसके बाद उन्होंने ‘Nishikanya’, ‘Mouchak’, ‘Swayamsiddha’, ‘Hotel Snow Fox’, ‘Pratima’, ‘Bhagyachakra’ और ‘Sandhi’ जैसी फिल्मों में काम किया।

बंगाली सिनेमा के साथ हिंदी फिल्मों में भी काम

मिथु मुखर्जी ने केवल बंगाली फिल्मों तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने हिंदी सिनेमा में भी काम किया।

1976 में दुलाल गुहा की ‘Khaan Dost’ के साथ उन्होंने हिंदी फिल्मों में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने बासु चटर्जी की ‘Safed Jhoot’, ‘Dillagi’ और ‘Do Ladke Dono Kadke’ जैसी फिल्मों में अभिनय किया।

इस तरह वह बंगाली और हिंदी, दोनों फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में सफल रहीं।

मिथु की खासियत केवल उनकी लोकप्रियता नहीं थी। उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार भी निभाए। 1970 के दशक में उनकी स्क्रीन मौजूदगी बंगाली सिनेमा की एक अलग पहचान बन गई थी।

‘Ashrita’ के बाद फिल्मों से बनाई दूरी

कुछ समय तक फिल्मों से दूर रहने के बाद मिथु मुखर्जी 1990 में फिर पर्दे पर लौटीं। चंद्र बरोट की ‘Ashrita’ उनकी वापसी वाली फिल्म थी।

इसके बाद उन्होंने फिल्मों से लगभग दूरी बना ली। धीरे-धीरे वह सार्वजनिक जीवन से भी दूर होती चली गईं। पिछले कई वर्षों में उनके बारे में सार्वजनिक रूप से बहुत कम जानकारी सामने आती थी।

मिथु मुखर्जी का फिल्मी करियर बहुत लंबा नहीं रहा, लेकिन 1970 के दशक की बंगाली फिल्मों में उनकी मौजूदगी आज भी याद की जाती है। ‘Marjina Abdulla’, ‘Mouchak’ और ‘Swayamsiddha’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ी।

लंबे समय तक कैंसर से जूझने के बाद मुंबई के अस्पताल में उनका निधन हुआ। उनके निधन के साथ बंगाली सिनेमा के एक महत्वपूर्ण दौर से जुड़ी एक चर्चित अभिनेत्री की यात्रा समाप्त हो गई।

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