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Mohammed Afroz 9/11

9/11 के बाद मुंबई में पकड़ा गया ‘पायलट’, ब्रिटेन-ऑस्ट्रेलिया में हमले का दावा; जांच में नहीं मिला सबूत

9/11 हमलों के करीब एक महीने बाद मुंबई पुलिस ने मोहम्मद अफरोज को गिरफ्तार किया था। उसने कथित तौर पर ब्रिटिश संसद और ऑस्ट्रेलिया में हमले की योजनाओं से जुड़े होने का दावा किया था। अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में जांच के बावजूद उसके दावों की पुष्टि नहीं हो सकी और बाद में उसे रिहा कर दिया गया।

9/11 के बाद मुंबई में पकड़ा गया ‘पायलट’, ब्रिटेन-ऑस्ट्रेलिया में हमले का दावा; जांच में नहीं मिला सबूत

Mohammed Afroz 9/11

Published by: cloud_hindi
  • Posted:September 11, 2026 9:14 am
  • Update:September 11, 2026 9:14 am
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11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर हुए आतंकी हमलों ने पूरी दुनिया को हिला दिया था। अल-कायदा के 19 ऑपरेटिव्स ने चार विमानों को हाईजैक किया था। दो विमान न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावर्स से टकराए, एक विमान पेंटागन से जा टकराया और चौथा विमान यात्रियों की कोशिश के बाद पेनसिल्वेनिया में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

लेकिन हमले के करीब एक महीने बाद मुंबई में गिरफ्तार किए गए एक युवक ने एक ऐसा दावा किया जिसने भारत में सनसनी फैला दी। उसका नाम था मोहम्मद अफरोज। पुलिस के मुताबिक, अफरोज ने पूछताछ में दावा किया था कि 11 सितंबर को अमेरिका के अलावा ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में भी हमलों की योजना थी और वह कथित साजिश का हिस्सा था। हालांकि बाद की जांच में उसके दावों के समर्थन में सबूत नहीं मिले।

दर्जी का बेटा, विदेश में पायलट ट्रेनिंग से पुलिस को शक

अफरोज मुंबई के चीता कैंप इलाके में रहता था। उसके पिता वहां दर्जी का काम करते थे। अक्टूबर 2001 में मुंबई पुलिस को जानकारी मिली कि अफरोज विदेश जाकर पायलट की ट्रेनिंग ले चुका है।

पुलिस के लिए यह बात इसलिए संदिग्ध थी क्योंकि एक आर्थिक रूप से कमजोर इलाके में रहने वाले युवक के लिए विदेश में महंगी पायलट ट्रेनिंग का खर्च उठाना आसान नहीं था। जांचकर्ताओं को शक हुआ कि किसी व्यक्ति या संगठन ने उसकी ट्रेनिंग के लिए पैसे उपलब्ध कराए होंगे।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि अफरोज भारत लौट चुका है। बाद में उसका पता नवी मुंबई के वाशी स्थित होटल एबट से चला। पुलिस ने वहां छापा मारकर उसे गिरफ्तार कर लिया।

ब्रिटिश संसद को निशाना बनाने का दावा

मुंबई पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में अफरोज ने दावा किया कि वह 9/11 से जुड़े अल-कायदा षड्यंत्र का हिस्सा था।

पुलिस के अनुसार, अफरोज ने कथित तौर पर बताया कि वह उस टीम का सदस्य था जिसे एक विमान हाईजैक करके ब्रिटिश संसद पर गिराना था। कथित योजना के मुताबिक, 11 सितंबर 2001 को लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट से मैनचेस्टर जा रहे विमान को हाईजैक किया जाना था।

लेकिन अमेरिका में हमलों की खबर सामने आने के बाद दुनिया भर के एयरपोर्ट्स पर सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई और यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी—ऐसा अफरोज ने पुलिस को बताया था।

ऑस्ट्रेलिया में भी हमले की कथित योजना

अफरोज ने कथित तौर पर यह भी बताया कि उसे ऑस्ट्रेलिया में आतंकवाद की ओर प्रेरित किया गया था और उसने तीन देशों—ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका—में पायलट ट्रेनिंग ली थी।

उसके कथित बयान के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न स्थित रियाल्टो टावर्स को निशाना बनाने के लिए भी एक अलग टीम तैयार की गई थी।

इन दावों की सच्चाई जानने के लिए मुंबई पुलिस ने अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में जांच टीमें भेजीं। तत्कालीन मुंबई पुलिस कमिश्नर एम. एन. सिंह भी जांच के सिलसिले में ब्रिटेन गए थे।

तीन देशों में जांच, लेकिन दावों की पुष्टि नहीं

अफरोज के दावे बेहद गंभीर थे। इसलिए उनकी जांच भारत से बाहर भी की गई। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसियों को उनके दावों की पुष्टि करने वाला सबूत नहीं मिला।

मुंबई पुलिस भी अदालत में अफरोज के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं जुटा सकी। बाद में उसके खिलाफ Prevention of Terrorism Act यानी POTA की धाराएं हटाने की मंजूरी दी गई और उसे रिहा कर दिया गया।

रिहाई के बाद अफरोज ने पुलिस पर लगाए आरोप

रिहाई के बाद अफरोज ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज कर दिया। उसका कहना था कि पुलिस ने उसे झूठे मामले में फंसाया और उसके खिलाफ लगाए गए आरोप मनगढ़ंत थे।

बाद में उसने अणुशक्ति नगर विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ा, हालांकि वह जीत नहीं सका।

25 साल बाद फिर चर्चा में क्यों आया मामला?

9/11 हमलों की 25वीं बरसी पर जब उस घटना के अलग-अलग पहलुओं को याद किया जा रहा है, तब मोहम्मद अफरोज का मामला भी फिर चर्चा में आया है।

हालांकि इस कहानी का सबसे अहम पहलू यह है कि अफरोज के दावे बेहद चौंकाने वाले थे, लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में जांच के बावजूद उनके समर्थन में सबूत नहीं मिले। इसलिए ब्रिटेन या ऑस्ट्रेलिया में 9/11 के दिन कथित हमलों की उनकी कहानी को स्थापित तथ्य मानने से पहले जांच के नतीजों और अफरोज के बाद के इनकार—दोनों को ध्यान में रखना जरूरी है।

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