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Shashi Tharoor BRICS

BRICS पर चिदंबरम के सवाल, शशि थरूर ने गिनाए भारत के फायदे

BRICS Summit 2026 से पहले पी. चिदंबरम ने हाल के सम्मेलनों से भारत को मिलने वाले ठोस लाभ पर सवाल उठाया। इसके बाद शशि थरूर ने BRICS के कूटनीतिक महत्व, Global South में भारत की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को इसके प्रमुख फायदों में गिनाया। हालांकि उन्होंने भारत के बढ़ते व्यापार घाटे और सदस्य देशों के बीच मतभेदों को भी बड़ी चुनौती बताया।

BRICS पर चिदंबरम के सवाल, शशि थरूर ने गिनाए भारत के फायदे

Shashi Tharoor BRICS

Published by: cloud_hindi
  • Posted:September 11, 2026 9:03 am
  • Update:September 11, 2026 9:03 am
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दिल्ली में 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS Summit 2026 से पहले कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं के बयानों ने अलग-अलग दृष्टिकोण सामने रखे हैं। वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने हाल के BRICS सम्मेलनों से भारत को मिलने वाले ठोस लाभ पर सवाल उठाया था। इसके एक दिन बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने BRICS के कूटनीतिक और रणनीतिक महत्व को रेखांकित करते हुए इसके कई फायदे गिनाए।

‘पिछले दो-तीन सम्मेलनों से कोई ठोस फायदा नहीं’: चिदंबरम

BRICS Summit की तैयारियों के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम ने पूछा कि BRICS, SCO, G20 और QUAD जैसे बहुपक्षीय समूहों में भारत की भागीदारी से देश को वास्तव में क्या हासिल हो रहा है।

ANI से बातचीत में चिदंबरम ने कहा कि उन्हें पिछले दो-तीन BRICS सम्मेलनों से कोई खास ठोस लाभ या परिणाम नजर नहीं आया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले के कुछ BRICS सम्मेलनों से भारत को कुछ ठोस फायदे मिले थे।

उनके बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कांग्रेस पर भारत की विदेश नीति तथा अंतरराष्ट्रीय भूमिका को लेकर नकारात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

शशि थरूर ने बताया BRICS क्यों महत्वपूर्ण है

चिदंबरम के बयान के बाद शशि थरूर ने BRICS के महत्व को दूसरे नजरिए से समझाया। उन्होंने कहा कि BRICS Global South के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।

थरूर के अनुसार, 11 BRICS सदस्य देश दुनिया की आबादी के बड़े हिस्से और वैश्विक GDP के करीब 41 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए इस समूह को मामूली कूटनीतिक मंच नहीं माना जा सकता।

उन्होंने भारत द्वारा BRICS Summit की मेजबानी को भी देश के लिए ‘बड़े सम्मान’ की बात बताया। उनके मुताबिक, इतने सारे राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों को एक मंच पर लाना भारत की ‘diplomatic convening power’ को दर्शाता है।

सिर्फ आर्थिक फायदा नहीं, कूटनीतिक महत्व भी

थरूर ने कहा कि BRICS का महत्व केवल सीधे व्यापारिक फायदे से नहीं मापा जाना चाहिए। Global South के देशों के साथ भारत के संबंध, अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर संवाद और विभिन्न देशों के नेताओं को एक साथ लाने की क्षमता भी इसकी उपलब्धियों का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि Global South में 100 से अधिक देश हैं, लेकिन BRICS के 11 सदस्य इस समूह की विविधता और प्रभावशाली देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

थरूर ने BRICS की चुनौतियां भी गिनाईं

हालांकि थरूर ने BRICS को पूरी तरह सफल मंच के तौर पर पेश नहीं किया। उन्होंने माना कि अलग-अलग सदस्य देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सहमति बनाना एक बड़ी चुनौती है।

उन्होंने ईरान युद्ध और रूस-यूक्रेन संघर्ष का उदाहरण दिया। मई में BRICS के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान सदस्य देशों के मतभेदों के कारण संयुक्त बयान जारी नहीं हो सका था। इसके बजाय भारत ने BRICS अध्यक्ष के रूप में Chair’s Declaration जारी किया था।

थरूर के मुताबिक, अगर भविष्य की बैठकों में भी ऐसी स्थिति दोहराई जाती है तो इससे समूह की एकजुटता और प्रभाव पर सवाल उठ सकते हैं।

भारत के व्यापार घाटे पर भी चिंता

थरूर ने BRICS के साथ भारत के व्यापार संतुलन को भी चिंता का विषय बताया।

उन्होंने कहा कि BRICS देशों के बीच व्यापार बढ़ रहा है, लेकिन भारत के लिए तस्वीर पूरी तरह अनुकूल नहीं है। BRICS देशों को भारत का निर्यात घटा है, जबकि वहां से भारत का आयात बढ़ा है।

इसलिए केवल व्यापार बढ़ने को भारत के लिए स्वतः लाभ के रूप में नहीं देखा जा सकता।

कांग्रेस में BRICS को लेकर अलग-अलग नजरिया?

चिदंबरम और थरूर के बयानों से BRICS को लेकर कांग्रेस के भीतर अलग-अलग प्राथमिकताएं दिखाई देती हैं।

चिदंबरम ने हाल के सम्मेलनों के ठोस और मापने योग्य नतीजों पर सवाल उठाया है। दूसरी ओर, थरूर आर्थिक लाभ के साथ-साथ कूटनीतिक प्रभाव, Global South में नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को भी BRICS की उपलब्धियों में शामिल करते हैं।

12-13 सितंबर को दिल्ली में होने वाले BRICS Summit के बीच दोनों नेताओं के अलग-अलग दृष्टिकोण ने भारत की BRICS नीति पर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

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