Sayan Bandyopadhyay Mohun Bagan
कभी सयान बंद्योपाध्याय को ईस्ट बंगाल के ‘घर के लड़के’ के तौर पर देखा जाता था। लेकिन आईएसएल खिताब जीतने के बाद उन्होंने लाल-पीली टीम का साथ छोड़कर पड़ोसी क्लब मोहन बागान का रुख किया।
इस फैसले को लेकर काफी चर्चा हुई थी। सयान को आलोचनाओं और तानों का भी सामना करना पड़ा। अब युवा फुटबॉलर ने मैदान पर ही इसका जवाब दे दिया है।
महामेडन स्पोर्टिंग के खिलाफ उनके निर्णायक गोल ने मोहन बागान को आठ साल बाद कोलकाता फुटबॉल लीग का चैंपियन बना दिया।
पिछले सीजन सयान ने ईस्ट बंगाल की ओर से कोलकाता लीग में खेला था। हालांकि आईएसएल में उन्हें नियमित मौके नहीं मिले।
कार्लेस कुआद्रात के कार्यकाल में उन्हें सीनियर टीम में मौका मिला था। कोलकाता डर्बी में दिमित्रि पेट्राटोस के साथ उनका विवाद भी चर्चा में रहा था।
इसके अलावा पंजाब एफसी के खिलाफ गोल करके उन्होंने अपनी क्षमता भी दिखाई थी। लेकिन कोचिंग स्टाफ में बदलाव के साथ उनकी स्थिति बदल गई।
नए सेटअप में वह धीरे-धीरे सीनियर टीम की योजनाओं से बाहर होते गए। आईएसएल जीतने के बाद ईस्ट बंगाल और सयान की राहें अलग हो गईं।
मोहन बागान में आने के बाद उनके सामने खुद को साबित करने की चुनौती थी। अब महत्वपूर्ण मैच में निर्णायक गोल करके उन्होंने अपनी टीम को खिताब दिलाया।
कोलकाता लीग के राउंड-रॉबिन चरण में मोहन बागान का प्रदर्शन बहुत प्रभावशाली नहीं रहा था। टीम किसी तरह शीर्ष तीन में जगह बनाकर सुपर सिक्स में पहुंची।
लेकिन अंतिम चरण में टीम का प्रदर्शन बदल गया। तीन मैचों में दो जीत के साथ मोहन बागान ने खिताब अपने नाम कर लिया।
महामेडन स्पोर्टिंग के खिलाफ टीम शुरुआत में पीछे थी। ऐसे समय में सयान के गोल ने मैच का रुख बदल दिया। साहाल अब्दुल समद के दो गोल ने भी टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई।
मैच के बाद सयान ने कहा कि गोल करना उनका काम है। लंबे समय से गोल नहीं कर पाने के बाद मुश्किल समय में गोल करने पर उन्हें खुशी हुई।
ईस्ट बंगाल के साथ कोलकाता लीग जीतने के बाद अब उन्होंने मोहन बागान के साथ भी यही ट्रॉफी जीत ली है। हालांकि सयान दोनों खिताबों में से किसी एक को ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं मानते।
उनके लिए दोनों सफलताएं बराबर हैं। उनका अगला लक्ष्य बेहतर प्रदर्शन करके भारतीय राष्ट्रीय टीम में जगह बनाना है।
मोहन बागान की सफलता में साहाल अब्दुल समद की भूमिका भी अहम रही। उन्होंने दो गोल किए, लेकिन व्यक्तिगत उपलब्धि का श्रेय लेने से इनकार किया।
साहाल ने कहा कि जीत हमेशा खुशी देती है। लेकिन जीत के साथ ट्रॉफी हासिल करने का अनुभव अलग होता है। उनके मुताबिक यह पूरी टीम की मेहनत का नतीजा है।
उनका मानना है कि टीम जब अपनी लय में होती है, तो मुश्किल स्थिति से भी वापसी कर सकती है। एक या दो गोल से पीछे होने के बावजूद टीम संघर्ष जारी रखती है।
आगे आईएफए शील्ड और आईएसएल जैसे टूर्नामेंट हैं। इससे पहले कोलकाता लीग की सफलता युवा खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है।
अनुभवी डिफेंडर शुभाशीष बोस ने भी कहा कि कोलकाता लीग जीतकर टीम ने अपना लक्ष्य पूरा किया। क्लब अधिकारी देवाशीष दत्ता ने उम्मीद जताई कि कोलकाता लीग भविष्य में भी प्रतिस्पर्धी बनी रहेगी।
आठ साल का इंतजार खत्म होने के बाद मोहन बागान समर्थकों का जश्न देखने लायक था। बारासात स्टेडियम से लौटते समय समर्थकों ने हरे-मैरून अबीर के साथ जश्न मनाया।
सयान भी समर्थकों के प्यार में डूबे नजर आए। अब समर्थकों की नजर अगले लक्ष्य पर है—आईएसएल ट्रॉफी।