कॉकरोच आंदोलन दिल्ली
‘कॉकरोच आंदोलन’ को लेकर दिल्ली में चल रहे प्रदर्शन और उसमें विदेशी मदद के आरोपों पर राज्य के मंत्री दिलीप घोष ने सोमवार को टिप्पणी की। प्रदर्शनकारी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में दिल्ली में इस आंदोलन को लेकर कई बार अशांति की स्थिति बनी।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा शामिल है। सूत्रों के मुताबिक, आंदोलन की शुरुआत नीट पेपर लीक के विरोध से हुई थी। बाद में यह ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे समेत कई मुद्दों तक फैल गया। यह भी दावा किया गया है कि जंतर-मंतर पर धरने से पहले अभिजीत दीप, आशुतोष रांका और सौरव दास समेत कई सीजेपी नेताओं को गिरफ्तार किया गया था।
दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि भारत को अशांत करने की कोशिश में विदेशी मदद शामिल है। उन्होंने कहा कि विदेशी फंडिंग का रास्ता बंद होने के कारण संबंधित लोग डर गए हैं। उनके बयान के अनुसार, “विदेशी ताकत है” और “विदेश से मदद दी जा रही है।” उन्होंने यह भी कहा, “फंडिंग का रास्ता बंद कर दिया गया है। इसी वजह से वे और डर गए हैं।”
सूत्रों के अनुसार, नाहिद इस्लाम ने भारतीय छात्रों, खासकर ‘कॉकरोच’ आंदोलनकारियों के समर्थन में कई पोस्ट किए थे। उनके आंदोलन का समर्थन करने के कारण बांग्लादेश पर सीधे मदद देने के आरोप लगाए गए। सूत्रों ने यह भी दावा किया है कि करीब दो साल पहले नाहिद इस्लाम बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाने की साजिश में शामिल थे।
सूत्रों के मुताबिक, इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी को उनके घर से गिरफ्तार किया गया था। जंतर-मंतर पर धरने से पहले कई नेताओं की गिरफ्तारी का भी दावा किया गया है। विदेशी मदद, फंडिंग और आंदोलन से बांग्लादेश के कथित संबंधों को लेकर ही दिलीप घोष की टिप्पणी सामने आई है।