China Job Crisis
चीन को लंबे समय तक दुनिया की ‘फैक्ट्री’ कहा जाता रहा है। सस्ती और बड़ी श्रमशक्ति के दम पर देश ने वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग में अपना दबदबा कायम किया। लेकिन अब इसी मॉडल में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है।
कारखाने चल रहे हैं, उत्पादन बढ़ रहा है और चीन तकनीक के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा है—लेकिन इन सबके लिए पहले की तुलना में कम कर्मचारियों की जरूरत पड़ रही है।
ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स के बढ़ते इस्तेमाल के साथ-साथ कुछ मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों का दूसरे देशों में जाना और रियल एस्टेट सेक्टर की कमजोरी चीन के रोजगार बाजार पर दबाव बढ़ा रही है। इसका सबसे बड़ा असर युवाओं पर दिखाई दे रहा है।
2026 में चीन से रिकॉर्ड 1.27 करोड़ ग्रेजुएट नौकरी के बाजार में प्रवेश कर रहे हैं। लेकिन अर्थव्यवस्था जितनी तेजी से रोजगार पैदा नहीं कर पा रही है, उतनी तेजी से युवा श्रम बाजार में आ रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, मई में 16 से 24 वर्ष के युवाओं की बेरोजगारी दर 15.6 प्रतिशत थी।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में यह दर बढ़कर 17.9 प्रतिशत हो गई, जो पिछले 11 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर था।
चीन के रोजगार संकट का एक उदाहरण Changzhou Xingyu Automotive Lighting का मामला है। कंपनी ने इस साल 440 नए ग्रेजुएट्स को नौकरी दी थी। लेकिन कुछ ही हफ्तों बाद उनमें से 107 को निकाल दिया गया।
इस घटना ने चीन में काफी चर्चा पैदा की। कंपनी ने बाद में इसे ‘मैनेजमेंट फेल्योर’ और संवेदनशीलता की कमी माना।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह केवल एक कंपनी की समस्या नहीं है। यह उस व्यापक बदलाव का संकेत है जिसमें उत्पादन बढ़ने के बावजूद पहले जितने कर्मचारियों की जरूरत नहीं पड़ रही है।
चीन ने मैन्युफैक्चरिंग में रोबोटिक्स और ऑटोमेशन को तेजी से अपनाया है। सरकार और कंपनियां AI और रोबोटिक्स में भारी निवेश कर रही हैं।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर फैक्ट्री में इंसानों की जगह रोबोट ले चुके हैं। ह्यूमनॉइड रोबोट अभी भी जटिल औद्योगिक कामों में कई सीमाओं से जूझ रहे हैं। लेकिन पारंपरिक औद्योगिक रोबोट कई उत्पादन प्रक्रियाओं में पहले से ही व्यापक रूप से इस्तेमाल हो रहे हैं।
चीन के रियल एस्टेट सेक्टर की कमजोरी ने भी रोजगार पर बड़ा असर डाला है। 2021 से 2025 के बीच निर्माण क्षेत्र से 1.4 करोड़ से अधिक कर्मचारी बाहर हुए हैं।
स्थायी नौकरियों की कमी के बीच गिग इकोनॉमी पर निर्भरता भी बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक 2026 में चीन के गिग वर्कर्स की संख्या लगभग 32 करोड़ तक पहुंच सकती है।
चीन में फैक्ट्री रोजगार घटने का मतलब यह नहीं कि भारत अपने आप दुनिया की अगली फैक्ट्री बन जाएगा।
Grant Thornton Bharat के आर्थिक सलाहकार ऋषि शाह के अनुसार, चीन में मैन्युफैक्चरिंग रोजगार 2013 के लगभग 15.2 करोड़ से घटकर 2025 में करीब 13.4 करोड़ रह गया। लेकिन इसी दौरान चीन का वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग निर्यात में हिस्सा बढ़ता रहा।
इसका मतलब है कि चीन का उत्पादन खत्म नहीं हो रहा, बल्कि कम कर्मचारियों के साथ अधिक उत्पादन हो रहा है।
भारत ने PLI जैसी योजनाओं के जरिए मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया है। लेकिन चीन को चुनौती देने के लिए भारत को केवल असेंबली से आगे बढ़कर कंपोनेंट निर्माण, रिसर्च, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और मजबूत सप्लाई चेन तैयार करनी होगी।
चीन की कहानी इसलिए भारत के लिए अवसर भी है और चेतावनी भी—तकनीक से उत्पादन बढ़ सकता है, लेकिन उससे रोजगार अपने आप नहीं बढ़ता।