F-35A combat loss
ईरान के खिलाफ चल रहे अमेरिकी सैन्य अभियान में हुए नुकसान का नया विवरण सामने आया है। कांग्रेसनल बजट ऑफिस यानी CBO की रिपोर्ट में कई अमेरिकी सैन्य संपत्तियों का उल्लेख है। इनमें अत्याधुनिक F-35A लड़ाकू विमान भी शामिल है।
रिपोर्ट के अनुसार, 1 अगस्त 2026 तक ईरान युद्ध में अमेरिकी सैन्य अभियान की लागत करीब 38 अरब डॉलर पहुंच गई थी। रिपोर्ट में युद्ध के दौरान विमानों और अन्य सैन्य उपकरणों के नुकसान का भी विवरण दिया गया है।
रिपोर्ट में एक F-35A Lightning II के नुकसान का उल्लेख किया गया है। यह अमेरिकी वायुसेना का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है।
ओपन-सोर्स विश्लेषक OSINTDefender ने CBO की सूची में F-35A के शामिल होने को इसके पहले संभावित युद्ध नुकसान के रूप में देखा है। हालांकि, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध अमेरिकी जानकारी में इस विमान के नुकसान की पूरी परिस्थितियां स्पष्ट नहीं हैं।
इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि विमान निश्चित रूप से ईरानी हमले में मार गिराया गया था। पहले की Congressional Research Service रिपोर्ट में भी एक F-35A के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी दी गई थी।
उस रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में अभियान के दौरान एक F-35A को जमीन से हुई फायरिंग में नुकसान पहुंचा था।
अमेरिकी नुकसान की सूची में 24 MQ-9 Reaper ड्रोन शामिल हैं। ये ड्रोन निगरानी और हमले से जुड़े अभियानों में इस्तेमाल किए जाते हैं। इसके अलावा चार F-15E Strike Eagle लड़ाकू विमान भी सूची में हैं। एक A-10 Thunderbolt II और एक E-3 Sentry विमान का भी उल्लेख किया गया है।
दो MC-130J विमान और एक HH-60W हेलीकॉप्टर भी नुकसान की सूची में हैं। एक MQ-4C Triton ड्रोन के नुकसान का भी उल्लेख किया गया है। KC-135 Stratotanker जैसे एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग विमान भी प्रभावित हुए। नई CBO सूची में दो KC-135 के नुकसान का उल्लेख है।
इसके साथ एक THAAD AN/TPY-2 रडार के नष्ट होने की जानकारी भी सामने आई है।
THAAD अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अमेरिकी अभियान की लागत भी काफी तेजी से बढ़ी है। CBO के मुताबिक, 1 अगस्त तक यह लागत करीब 38 अरब डॉलर थी। इसमें इस्तेमाल किए गए हथियारों, अतिरिक्त उड़ानों, ईंधन और युद्ध में खोए उपकरणों की लागत शामिल है। युद्ध में नष्ट या खोए उपकरणों को बदलने की लागत करीब 1.9 अरब डॉलर आंकी गई है।
CBO ने यह भी चेतावनी दी है कि संघर्ष जारी रहने पर खर्च बढ़ता रहेगा।हिंसा की तीव्रता के आधार पर हर महीने अतिरिक्त अरबों डॉलर खर्च हो सकते हैं। इस संघर्ष का आर्थिक असर भी सामने आ रहा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर से ऊर्जा आपूर्ति और जहाजरानी में बाधा से तेल और गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
इसका असर व्यापक महंगाई पर भी पड़ सकता है।