नाहिद इस्लाम भारत आंदोलन
बांग्लादेशी छात्र नेता नाहिद इस्लाम ने भारत के युवाओं और लोकतांत्रिक ताकतों के प्रति एकजुटता जताते हुए दिल्ली के आंदोलनकारियों का समर्थन किया है। 10 अक्टूबर 2026 को ढाका से जारी बताए गए एक बयान में उन्होंने चुनावी जवाबदेही, लोकतांत्रिक अधिकारों और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े होने की बात कही।
नाहिद ने अपने एक्स हैंडल पर साझा किए गए संदेश में हिरासत में लिए गए छात्र नेताओं, आंदोलनकारियों और पत्रकारों के बारे में जानकारी सार्वजनिक करने की अपील की। उन्होंने हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई और उन्हें हिरासत में लेने का कारण बताए जाने की मांग भी की। बयान में पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर देने की बात कही गई है।
बयान में दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगाए गए प्रतिबंधों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने को लेकर चिंता जताई गई है। इसमें शाहीनबाग, जेएनयू और जादवपुर विश्वविद्यालय का भी उल्लेख है। नाहिद के अनुसार, भारत में आंदोलनकारी चुनावी जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
बयान में भारत के आंदोलन को बांग्लादेश के जुलाई 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन से जोड़कर बताया गया है। इसमें धार्मिक वर्चस्ववाद, अधिनायकवाद, सांप्रदायिक नफरत और राजनीतिक असहिष्णुता का विरोध किया गया है। नाहिद ने संदेश में कहा, “आप जान लें कि आप अकेले नहीं हैं। सीमा की बाड़ तोड़कर हम भी आपके साथ हैं।”
बयान में यह भी कहा गया है कि जुलाई 2024 का आंदोलन 15 साल के अधिनायकवादी शासन के खिलाफ देशव्यापी विद्रोह में बदल गया था। संयुक्त राष्ट्र के बाद के आकलन के रूप में इसमें “1,400 तक” लोगों के मारे जाने का उल्लेख किया गया है। भारत की स्थिति और हिरासत से जुड़े दावे बयान में नाहिद के पक्ष के तौर पर रखे गए हैं।