Trump TV White House
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और मीडिया संगठनों के बीच टकराव अब एक नए चरण में पहुंच गया है। CNN, MS NOW और Politico के पत्रकारों को व्हाइट हाउस में प्रवेश से रोकने के बाद विवाद और बढ़ गया है।
इसी बीच व्हाइट हाउस ने 24 घंटे चलने वाली स्ट्रीमिंग सेवा ‘Trump TV’ शुरू की है। इसमें ट्रंप प्रशासन के बयान, राष्ट्रपति के भाषण, सरकारी घोषणाएं और पुराने महत्वपूर्ण वीडियो दिखाए जा रहे हैं। व्हाइट हाउस के अनुसार, इसका उद्देश्य प्रशासन के वीडियो को सीधे दर्शकों तक पहुंचाना है।
व्हाइट हाउस प्रेस पूल एक साझा मीडिया व्यवस्था है। राष्ट्रपति के हर कार्यक्रम को हर समाचार संगठन के लिए अलग-अलग कवर करना संभव नहीं होता। इसलिए कुछ प्रमुख नेटवर्क बारी-बारी से कार्यक्रमों की वीडियो कवरेज करते हैं।
टीवी पूल में ABC, CBS, CNN, Fox News और NBC शामिल हैं। कोई एक नेटवर्क किसी कार्यक्रम की कवरेज करता है और उसका वीडियो दूसरे मीडिया संगठनों के साथ साझा करता है। इससे राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की व्यापक टीवी कवरेज संभव होती है।
यह व्यवस्था राष्ट्रपति के अचानक दिए गए बयान और महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रमों की कवरेज में भी मदद करती है।
लेकिन CNN को व्हाइट हाउस में प्रवेश से रोकने के बाद स्थिति बदल गई। CNN को दिए गए निर्धारित पूल ड्यूटी की जगह किसी अन्य नेटवर्क को जिम्मेदारी देने का फैसला नहीं किया गया।
ट्रंप प्रशासन ने CNN, MS NOW और Politico के पत्रकारों को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित कर दिया। ट्रंप ने इन संस्थानों की रिपोर्टिंग को ‘फेक न्यूज’ बताते हुए उनकी आलोचना की है।
19 सितंबर को तीनों संगठनों के पत्रकारों को व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश नहीं दिया गया। संबंधित मीडिया संस्थानों के अनुसार, उनके प्रेस पास भी निष्क्रिय या जब्त किए गए।
इसके बाद CNN, MS NOW और Politico ने प्रशासन के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया। उनका कहना है कि यह कदम अमेरिकी संविधान के First Amendment में दिए गए प्रेस अधिकारों और उचित कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी सुरक्षा का उल्लंघन करता है।
व्हाइट हाउस ने इस दावे को खारिज किया है। उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा कि संबंधित मीडिया संगठन बाहर से रिपोर्टिंग कर सकते हैं और उनके पास अपनी बात रखने की स्वतंत्रता है।
विवाद के बीच व्हाइट हाउस ने ‘Trump TV’ शुरू किया है। यह प्रशासन के वीडियो को सीधे दर्शकों तक पहुंचाने का माध्यम है।
इसमें ट्रंप के भाषण, सरकारी घोषणाएं, राष्ट्रपति के कार्यक्रम और प्रशासन द्वारा चुने गए पुराने वीडियो शामिल हैं। इसका मतलब है कि किसी कार्यक्रम में स्वतंत्र टीवी पूल उपलब्ध नहीं होने पर भी व्हाइट हाउस अपना वीडियो जारी कर सकता है।
इसका असर व्हाइट हाउस के नए हेलिपैड के उद्घाटन के दौरान भी दिखाई दिया। उस कार्यक्रम में नियमित टीवी पूल मौजूद नहीं था। व्हाइट हाउस ने अपना स्ट्रीम उपलब्ध कराया, लेकिन पेशेवर टीवी पूल की ऑडियो व्यवस्था नहीं होने के कारण ट्रंप की कुछ टिप्पणियां स्पष्ट रूप से सुनाई नहीं दीं।
यहीं से Trump TV की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सरकारी चैनल प्रशासन का संदेश सीधे जनता तक पहुंचा सकता है। लेकिन वह स्वतंत्र पत्रकारिता का विकल्प नहीं है, क्योंकि उसके वीडियो प्रशासन द्वारा तैयार या चुने जाते हैं।
दूसरी ओर, टीवी पूल का उद्देश्य राष्ट्रपति के कार्यक्रमों का स्वतंत्र ऑडियो-विजुअल रिकॉर्ड तैयार करना और उसे अलग-अलग मीडिया संगठनों के साथ साझा करना है।
मामला अब अदालत में पहुंच चुका है। इसलिए आगे Trump TV की भूमिका और व्हाइट हाउस की मीडिया एक्सेस को लेकर कानूनी स्थिति क्या होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।