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कृषि भवन कदीमी मस्जिद

केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा, सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत कदीमी मस्जिद हटानी होगी

केंद्र ने कहा कि केंद्रीय सरकारी कार्यालय परिसर में स्थायी धार्मिक ढांचे को बनाए रखना सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के अनुरूप नहीं है। मस्जिद की देखरेख करने वाली समिति ने नए निर्माण में नमाज के लिए जगह जारी रखने की मांग की है।

केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा, सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत कदीमी मस्जिद हटानी होगी

कृषि भवन कदीमी मस्जिद

Published by: cloudtv-newsroom
  • Posted:November 3, 2026 5:56 pm
  • Update:November 3, 2026 5:56 pm
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केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया है कि सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत दिल्ली के कृषि भवन परिसर में स्थित कदीमी मस्जिद को हटाना होगा। मस्जिद डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड पर कृषि भवन परिसर के भीतर और केंद्रीय सचिवालय क्षेत्र में स्थित है।

केंद्र ने क्या कहा

केंद्र ने अदालत में दाखिल हलफनामे में मस्जिद को बनाए रखने और उसके स्थानांतरण के लिए वैकल्पिक जमीन देने का विरोध किया। उसका कहना है कि कृषि भवन और केंद्रीय सचिवालय परिसर सरकारी, प्रशासनिक और जनसेवा से जुड़े कार्यों के लिए इस्तेमाल होने वाले धर्मनिरपेक्ष सार्वजनिक परिसर हैं।

केंद्र के वकील निशांत गौतम ने कहा, “केंद्रीय सरकारी कार्यालय परिसर की सीमाओं के भीतर किसी स्थायी धार्मिक ढांचे को बनाए रखना या उसकी मांग करना स्वीकार्य नहीं है और यह सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के अनुरूप नहीं है।”

सेंट्रल विस्टा योजना का संबंध

केंद्र के अनुसार, सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास मास्टर प्लान में प्लॉट नंबर 120 पर कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरियट बिल्डिंग 4 और 5 के निर्माण का प्रावधान है। योजना के तहत मौजूदा शास्त्री भवन और कृषि भवन की जगह आधुनिक सरकारी ढांचा तैयार किया जाना है।

केंद्र ने कहा कि मस्जिद जिस जमीन पर बनी है, वह सरकारी जमीन है और उसका प्रशासन तथा नियंत्रण लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस यानी L&DO के पास है। केंद्र के मुताबिक, 8 नवंबर 1940 के समझौते के तहत मस्जिद समिति को केवल अनुमति के आधार पर कब्जा मिला था और जमीन पर उसका कोई अधिकार, स्वामित्व या हित नहीं है।

मस्जिद समिति की मांग

मस्जिद की देखरेख करने वाली समिति ने कहा है कि वह सेंट्रल विस्टा परियोजना में बाधा नहीं डालना चाहती। हालांकि, उसने नए प्रस्तावित ढांचे में नमाज के लिए सुविधा जारी रखने की मांग की है। समिति ने परियोजना के तहत मस्जिद के ध्वस्तीकरण की आशंका जताई है।

दिल्ली वक्फ बोर्ड ने 1970 में मस्जिद को वक्फ संपत्ति के रूप में अधिसूचित किया था। केंद्र ने यह भी कहा कि कृषि भवन से दो किलोमीटर के दायरे में एक अन्य पूरी तरह कार्यरत मस्जिद मौजूद है, जिसे पास के इबादत स्थल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

अगली सुनवाई 23 नवंबर को

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अनिश दयाल कर रहे हैं। इससे पहले 17 सितंबर को सुनवाई हुई थी और 2 नवंबर को मामला अदालत के सामने आया। सरकारी परिसरों में नमाज की जगहों और केंद्र की दलीलों पर अदालत की प्रतिक्रिया अभी लंबित है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को निर्धारित है।

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