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पश्चिम बंगाल सैलरी एडवांस योजना

पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों के लिए सैलरी एडवांस स्कीम शुरू

राज्य सरकार की नई योजना के तहत कर्मचारी इलाज, बच्चों की पढ़ाई या अचानक आए पारिवारिक खर्च के लिए शर्तों के साथ वेतन का कुछ हिस्सा पहले ले सकेंगे। योजना में शॉर्ट-टर्म और मल्टी-मंथ एडवांस की सुविधा है।

पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों के लिए सैलरी एडवांस स्कीम शुरू

पश्चिम बंगाल सैलरी एडवांस योजना

Published by: cloudtv-newsroom
  • Posted:November 5, 2026 1:17 pm
  • Update:November 5, 2026 1:17 pm
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पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य प्रशासन के स्थायी कर्मचारियों के लिए ‘वेस्ट बंगाल सैलरी एडवांस स्कीम’ शुरू की है। इसके तहत तय शर्तों के अनुसार कर्मचारी वेतन चक्र से पहले राशि ले सकेंगे। यह व्यवस्था डब्ल्यूबीआईएफएमएस और एचआरएमएस पोर्टल से जुड़ी होगी।

दो तरह की एडवांस सुविधा

योजना में ‘शॉर्ट-टर्म एडवांस’ और ‘मल्टी-मंथ एडवांस’—दो सुविधाएं शामिल हैं। राज्य प्रशासन के स्थायी कर्मचारी तथा ग्रुप ए से ग्रुप डी तक के समकक्ष स्तर के अधिकारी और कर्मचारी इसके दायरे में रहेंगे।

शॉर्ट-टर्म एडवांस के तहत संबंधित महीने के कुल देय वेतन का अधिकतम 50 प्रतिशत लिया जा सकेगा। इसे अधिकतम 60 दिन या अगले वेतन चक्र के भीतर चुकाना होगा। तय समय पर भुगतान करने पर ब्याज, प्रोसेसिंग फीस, प्लेटफॉर्म फीस या कन्वीनियंस फीस नहीं लगेगी।

मल्टी-मंथ एडवांस की अवधि

मल्टी-मंथ एडवांस की अवधि 2 महीने से लेकर अधिकतम 60 महीने तक होगी। यह अवधि कर्मचारी की सेवानिवृत्ति की समयसीमा से आगे नहीं जा सकेगी। कर्जदाता के जोखिम आकलन और रिजर्व बैंक के नियमों के आधार पर ऋण की सीमा तय होगी। यह सीमा कुल मासिक वेतन के अधिकतम 30 गुना तक हो सकती है।

मासिक ईएमआई कुल वेतन के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकेगी। ब्याज दर और अन्य शुल्क की जानकारी पहले से ‘की फैक्ट स्टेटमेंट’ के जरिए दी जाएगी। अवधि पूरी होने से पहले पूरी राशि चुकाने पर फोरक्लोजर या प्री-पेमेंट शुल्क नहीं लगेगा।

फीस और बकाया भुगतान के नियम

कर्मचारी की वजह से तय समय के बाद जानकारी जमा होने पर अधिकतम 1 प्रतिशत ट्रांजैक्शन फीस लग सकती है। हालांकि, सरकारी विभाग या डीडीओ की वजह से देरी होने पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।

एक कर्मचारी एक समय में एक से अधिक सुविधा सक्रिय नहीं रख सकेगा। नौकरी छोड़ने या सेवानिवृत्ति की स्थिति में बकाया राशि अंतिम देय रकम से समायोजित की जाएगी। योजना का उद्देश्य इलाज, बच्चों की पढ़ाई और अचानक आए पारिवारिक आर्थिक संकट जैसे खर्चों के लिए कर्मचारियों को वेतन का कुछ हिस्सा पहले लेने की सुविधा देना है।

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