Sujit Bose bail case
पूर्व पश्चिम बंगाल मंत्री सुजीत बोस की जमानत याचिका पर कलकत्ता हाई कोर्ट में बड़ा मोड़ आया है। जस्टिस सुव्रा घोष ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया है। खास बात यह है कि मामले की सुनवाई पहले ही पूरी हो चुकी थी और फैसला सुरक्षित रखा गया था। इसके बाद जज के चैंबर से केस रिकॉर्ड हासिल करने की कथित कोशिश को लेकर यह घटनाक्रम सामने आया।
सुजीत बोस की जमानत याचिका पर जस्टिस सुव्रा घोष की एकल पीठ सुनवाई कर रही थी। मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 17 अगस्त 2026 को सुनवाई पूरी हो गई थी। इसके बाद जस्टिस घोष ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। यानी अब मामले में अगला कदम फैसला सुनाना था।
लेकिन 18 अगस्त को घटनाक्रम अचानक बदल गया। कोर्ट के आदेश में दर्ज जानकारी के अनुसार, जब जस्टिस घोष अदालत में थीं, तब सुजीत बोस की ओर से पेश एक वकील कथित तौर पर उनके चैंबर में पहुंचे। उनके साथ जज के निजी सचिव भी थे।
आरोप है कि चैंबर के बाहर मौजूद कर्मचारियों से मामले की फाइल लाने को कहा गया। कर्मचारियों ने रिकॉर्ड देने से इनकार कर दिया। इसके बाद चैंबर में प्रवेश कर रिकॉर्ड देखने की कोशिश किए जाने का भी आरोप है।
इस घटना को जस्टिस सुव्रा घोष ने गंभीरता से लिया। 19 अगस्त के अपने आदेश में उन्होंने इस व्यवहार की कड़ी निंदा की। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि इस कार्रवाई में किसी “छिपे हुए उद्देश्य” की गंध आती है। इसके बाद उन्होंने मामले की जानकारी कलकत्ता हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को दी।
इसके बाद जस्टिस घोष ने इस मामले से खुद को अलग करने का फैसला किया। अब सुजीत बोस की जमानत याचिका को हाई कोर्ट की प्रशासनिक व्यवस्था के तहत दूसरी पीठ के सामने रखा जाएगा।
हालांकि, जस्टिस घोष के आदेश में सुजीत बोस की जमानत याचिका के गुण-दोष पर कोई फैसला नहीं किया गया है। यानी जमानत का सवाल अभी भी लंबित है।
सुजीत बोस को कथित नगरपालिका भर्ती घोटाले के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने 11 मई 2026 को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि नगरपालिका नियुक्तियों के लिए करीब 150 उम्मीदवारों के नाम की सिफारिश की गई थी। ईडी ने इस प्रक्रिया से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, ये जांच एजेंसी के आरोप हैं और अदालत में अभी दोष सिद्ध नहीं हुआ है।
17 अगस्त की सुनवाई के दौरान सुजीत बोस की ओर से दलील दी गई थी कि नगरपालिका भर्ती मामले की जांच काफी आगे बढ़ चुकी है। इसलिए उन्हें लगातार हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है। ईडी ने इस दलील का विरोध किया था। इसके बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था।
अब जस्टिस सुव्रा घोष के मामले से अलग होने के बाद नई पीठ का गठन और अगली सुनवाई महत्वपूर्ण हो गई है। यह भी तय होगा कि नए बेंच के सामने पूरी बहस फिर से होगी या पिछली सुनवाई के रिकॉर्ड के आधार पर आगे की प्रक्रिया चलेगी।