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rising sea levels Kolkata Mumbai

कोलकाता-मुंबई पर मंडरा रहा समुद्र का खतरा! लाखों लोग ‘तत्काल जोखिम’ में, UN ने दी चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि समुद्र के बढ़ते जलस्तर के कारण कोलकाता और मुंबई समेत दक्षिण एशिया के निचले डेल्टा शहरों में लाखों लोग अपने घर, आजीविका और जीवन खोने के जोखिम में हैं। कोलकाता, मुंबई और ढाका में 1.4 करोड़ से अधिक लोगों पर इसका असर पड़ सकता है।

कोलकाता-मुंबई पर मंडरा रहा समुद्र का खतरा! लाखों लोग ‘तत्काल जोखिम’ में, UN ने दी चेतावनी

rising sea levels Kolkata Mumbai

Published by: cloud_hindi
  • Posted:September 2, 2026 9:23 am
  • Update:September 2, 2026 9:23 am
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समुद्र का बढ़ता जलस्तर अब भविष्य की दूर की आशंका नहीं रह गया है। जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया के कई तटीय इलाकों में इसके प्रभाव अभी से दिखाई देने लगे हैं। संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट ने भारत के दो बड़े शहरों—कोलकाता और मुंबई—को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, समुद्र का जलस्तर लगातार बढ़ने से इन शहरों में लाखों लोगों के घर स्थायी रूप से जलमग्न होने का ‘तत्काल जोखिम’ है।

1.4 करोड़ से अधिक लोगों पर खतरा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव की ‘Challenges related to sea level rise and ways and approaches to address it’ रिपोर्ट में समुद्र के बढ़ते स्तर को दुनिया के सबसे गंभीर और तेजी से बढ़ते खतरों में से एक बताया गया है।

UN की हालिया जानकारी के अनुसार, दक्षिण एशिया के निचले डेल्टा शहरों में कोलकाता, मुंबई और ढाका विशेष रूप से संवेदनशील हैं। इन तीन शहरों में 1.4 करोड़ से अधिक लोग अपने घर, आजीविका और जीवन को समुद्र के बढ़ते जलस्तर के कारण खोने के जोखिम में हैं।

समस्या केवल घरों तक सीमित नहीं रहेगी। समुद्र का जलस्तर बढ़ने से बंदरगाह, सड़कें, जल आपूर्ति, कृषि, मत्स्य पालन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।

क्यों बढ़ रहा है समुद्र का जलस्तर?

मानव-जनित जलवायु परिवर्तन समुद्र के बढ़ते स्तर का प्रमुख कारण है। ग्लेशियरों और बर्फ की चादरों के पिघलने से समुद्र में अतिरिक्त पानी पहुंच रहा है। साथ ही गर्म होते समुद्र का पानी thermal expansion के कारण फैल रहा है।

UN के मुताबिक, 2014 से 2023 के बीच वैश्विक समुद्र स्तर औसतन 4.7 मिलीमीटर प्रति वर्ष बढ़ा। 2024 में यह दर बढ़कर रिकॉर्ड 5.9 मिलीमीटर प्रति वर्ष हो गई। इससे साफ है कि समुद्र के बढ़ते स्तर की गति धीमी नहीं हो रही, बल्कि तेज हो रही है।

सिर्फ पर्यावरण नहीं, इंसानों का भविष्य भी खतरे में

UN ने स्पष्ट किया है कि sea-level rise केवल पर्यावरण की समस्या नहीं है। इसका सीधा संबंध स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, मानवाधिकार, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और लोगों की पहचान से भी है।

तटीय इलाकों में समुद्री पानी के प्रवेश से मीठे पानी के स्रोतों में लवणता बढ़ सकती है। खेती प्रभावित हो सकती है और मछली पालन तथा पर्यटन जैसे क्षेत्रों को नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा तटीय कटाव और बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़ने पड़ सकते हैं।

कोलकाता के लिए क्यों गंभीर है खतरा?

कोलकाता गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना डेल्टा क्षेत्र से जुड़े निचले भूभाग में स्थित है। ऐसे में समुद्र का बढ़ता स्तर, तटीय जलभराव और अत्यधिक मौसम की घटनाएं मिलकर शहर तथा आसपास के इलाकों के लिए जोखिम बढ़ा सकती हैं।

UN का कहना है कि समुद्र के बढ़ते स्तर को केवल तटों की सुरक्षा की समस्या के रूप में नहीं देखा जा सकता। नदी घाटियों, मीठे पानी, तटीय इलाकों, समुद्र और शहरी नियोजन को एक साथ जोड़कर दीर्घकालिक रणनीति बनानी होगी।

अभी से तैयारी जरूरी

UN के अनुसार समुद्र के बढ़ते स्तर का कुछ प्रभाव अब अपरिहार्य हो चुका है। लेकिन आने वाले दशकों में स्थिति कितनी गंभीर होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि दुनिया greenhouse gas emissions को कितनी तेजी से कम करती है और तटीय शहरों को बदलती जलवायु के अनुरूप कितनी प्रभावी तरीके से तैयार किया जाता है।

कोलकाता और मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहरों के लिए तटीय infrastructure मजबूत करना, बेहतर drainage व्यवस्था, बाढ़ प्रबंधन, मीठे पानी की सुरक्षा और जोखिम वाले इलाकों के लिए दीर्घकालिक urban planning बेहद जरूरी होगी।

संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी का संदेश स्पष्ट है—समुद्र के बढ़ते स्तर का खतरा भविष्य की बात नहीं है; जलवायु परिवर्तन का यह प्रभाव अब लोगों के दरवाजे तक पहुंच चुका है।

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