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West Bengal Anti-Goonda Law

West Bengal Anti-Goonda Law: संपत्ति नुकसान पर सख्त कार्रवाई का संदेश

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने असामाजिक गतिविधियों, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिसकर्मियों पर हमले के मामलों में सख्त कार्रवाई का संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि...

West Bengal Anti-Goonda Law: संपत्ति नुकसान पर सख्त कार्रवाई का संदेश

West Bengal Anti-Goonda Law

Published by: cloud_hindi
  • Posted:August 24, 2026 3:42 pm
  • Update:August 24, 2026 3:42 pm
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पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने असामाजिक गतिविधियों, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिसकर्मियों पर हमले के मामलों में सख्त कार्रवाई का संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और नुकसान की भरपाई के लिए जिम्मेदार लोगों से मुआवजा वसूला जाएगा।

राज्य विधानसभा ने जून 2026 में असामाजिक गतिविधियों और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े दो महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए थे। इनमें West Bengal Public Safety and Control of Anti-Social Activities Bill, 2026 और West Bengal Maintenance of Public Order (Amendment) Bill, 2026 शामिल हैं। सरकार ने इन्हें असामाजिक गतिविधियों, संगठित अपराध, हिंसा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ा कानूनी ढांचा बताया है।

हालांकि, इन कानूनों की कानूनी स्थिति को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल भी सामने आया है। जुलाई में Governor की मंजूरी के बाद 13 जुलाई से इन्हें लागू किए जाने की खबरें आई थीं। लेकिन 6 अगस्त को कलकत्ता हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से बताया गया कि Anti-Goonda Bill को अभी राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिली है। अदालत ने इसी आधार पर संबंधित याचिकाओं को समय से पहले दायर माना।

सरकारी संपत्ति को नुकसान पर मुआवजा

नए कानूनी ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से मुआवजा वसूलने की व्यवस्था है। आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसा के दौरान संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई के लिए Claims Commission की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है।

सरकार का तर्क है कि मौजूदा कानूनी व्यवस्था में हिंसक घटनाओं के दौरान हुए संपत्ति नुकसान की लागत जिम्मेदार लोगों से वसूलने के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं थे। नए प्रावधानों का उद्देश्य ऐसे मामलों में आर्थिक जिम्मेदारी तय करना है।

Public Safety Bill में असामाजिक गतिविधियों से जुड़े लोगों के खिलाफ preventive detention का भी प्रावधान है। निर्धारित परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक हिरासत में रखने की व्यवस्था का उल्लेख विधेयक में किया गया है।

पुलिस पर हमला भी निशाने पर

राज्य सरकार ने साफ किया है कि विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा, पुलिसकर्मियों पर हमला या सार्वजनिक व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाली गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

29 जून को विधानसभा में Public Safety Bill पारित हुआ था। Akashvani की रिपोर्ट के अनुसार, विधेयक के पक्ष में 176 वोट पड़े जबकि 41 सदस्यों ने इसका विरोध किया। सरकार ने इसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई और सार्वजनिक सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

विधेयक में preventive detention के अलावा externment और असामाजिक गतिविधियों से जुड़ी संपत्ति पर कार्रवाई जैसे प्रावधानों की भी चर्चा है।

कानून की वैधता को लेकर अहम सवाल

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम अगस्त में सामने आया। कलकत्ता हाई कोर्ट में Anti-Goonda Bill को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि विधेयक अभी राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। अदालत ने इस आधार पर याचिकाओं को premature मानते हुए खारिज कर दिया।

इससे सरकार की ओर से कानून लागू होने के दावे और उसकी संवैधानिक स्थिति के बीच अंतर का सवाल खड़ा हुआ है। जुलाई में Governor की मंजूरी के बाद कानून के लागू होने की खबरें सामने आई थीं, लेकिन बाद की न्यायिक कार्यवाही में Presidential assent लंबित होने की बात सामने आई।

सरकार का संदेश हालांकि स्पष्ट है—सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, पुलिस पर हमला करने और गंभीर असामाजिक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अब इस कानून की वास्तविक कानूनी स्थिति और इसके प्रावधानों के लागू होने का अगला महत्वपूर्ण चरण राष्ट्रपति की मंजूरी तथा औपचारिक notification पर निर्भर करेगा।

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