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नोआखली का रुस्तम खान

दिल्ली तबादले से पहले सी मुरुगन का उपन्यास ‘नोआखली का रुस्तम खान’ कोलकाता में जारी

पश्चिम बंगाल कैडर के आईएएस अधिकारी सी मुरुगन का उपन्यास ‘नोआखली का रुस्तम खान’ शनिवार को कोलकाता प्रेस क्लब में जारी किया गया। 1946 के कलकत्ता और उसके बाद नोआखली में हुई सांप्रदायिक हिंसा की पृष्ठभूमि पर लिखी यह किताब बंगला, अंग्रेजी और तमिल में प्रकाशित हुई है।

दिल्ली तबादले से पहले सी मुरुगन का उपन्यास ‘नोआखली का रुस्तम खान’ कोलकाता में जारी

नोआखली का रुस्तम खान

Published by: cloudtv-newsroom
  • Posted:October 24, 2026 6:41 pm
  • Update:October 24, 2026 6:41 pm
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पश्चिम बंगाल कैडर के आईएएस अधिकारी सी मुरुगन के दिल्ली तबादले से पहले उनका उपन्यास ‘नोआखली का रुस्तम खान’ शनिवार को कोलकाता प्रेस क्लब में जारी किया गया। पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में साहित्यकार शीर्षेंदु मुखोपाध्याय, अभिनेत्री गार्गी रॉयचौधरी, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा और शुभेंदु अधिकारी मौजूद थे।

1946 के कलकत्ता और नोआखली की पृष्ठभूमि

उपन्यास 1946 के कलकत्ता के ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ के आसपास हुए दंगों और उसके बाद नोआखली में हुई सांप्रदायिक हिंसा की पृष्ठभूमि पर आधारित है। कहानी का घटनाक्रम कलकत्ता और नोआखली के बीच आगे बढ़ता है। इसमें धार्मिक पहचान, सामाजिक वर्ग-विभाजन, राजनीतिक अस्थिरता, सांप्रदायिक नफरत और मानवीयता से जुड़े सवालों को उठाया गया है।

रुस्तम खान की कहानी

किताब का केंद्रीय पात्र रुस्तम खान नोआखली के लामचर का निवासी है। कहानी के अनुसार, रुस्तम नीलांजना नाम की एक जमींदार की बेटी से प्रेम करता है। वह कलकत्ता आता है और परिस्थितियां बदलने के बाद नोआखली लौट जाता है।

मुरुगन ने कहा, “किस्मत रुस्तम को कलकत्ता ले आती है। लेकिन परिस्थितियों में बदलाव के कारण उसे फिर नोआखली लौटना पड़ता है। वहां उसके सामने और भी कठिन वास्तविकता आती है। एक तरफ निजी प्रेम है, तो दूसरी तरफ हिंसा और संघर्ष के बीच संकट में पड़े लोगों की जान बचाने की जिम्मेदारी। जब आसपास के लोग धार्मिक पहचान के आधार पर अपना पक्ष चुन रहे हैं, तब रुस्तम को तय करना है कि वह किस रास्ते पर चलेगा—अपने सपने पूरे करेगा या संकट में पड़े लोगों के साथ खड़ा होगा?”

दिल्ली में नई जिम्मेदारी

मुरुगन 2007 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। उनका जन्म तमिलनाडु में हुआ। पश्चिम बंगाल में करीब 19 वर्ष काम करने के बाद वह केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय में संयुक्त सचिव के तौर पर दिल्ली में जिम्मेदारी संभालेंगे। वह रविवार को दिल्ली के लिए रवाना हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, वह 15 सितंबर 2030 तक इस पद पर काम करेंगे।

मुरुगन ने करियर की शुरुआत स्टेट बैंक ऑफ मैसूर में प्रोबेशनरी ऑफिसर के रूप में की थी। इसके बाद उन्होंने तमिलनाडु पुलिस सेवा में डीएसपी के तौर पर काम किया। पश्चिम बंगाल में वह दक्षिण दिनाजपुर के अतिरिक्त जिलाधिकारी और टी बोर्ड के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। एसआईआर के दौरान उन्होंने स्पेशल रोल ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी निभाई थी।

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