ट्रंप और डेमोक्रेटिक कांग्रेस
डेमोक्रेटिक नियंत्रण वाली प्रतिनिधि सभा और सीनेट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए सामान्य विधायी गतिरोध से अलग स्थिति पैदा कर सकती हैं। एक विश्लेषण में कहा गया है कि दोनों सदनों में डेमोक्रेट बहुमत की स्थिति में राष्ट्रपति की शक्तियों को लेकर तीखा संघर्ष हो सकता है। विदेश नीति और सैन्य कार्रवाई इस टकराव के सबसे संवेदनशील क्षेत्र बताए गए हैं।
विश्लेषण में ट्रंप को ऐसे लेन-देन पर आधारित लोकप्रियतावादी नेता के रूप में पेश किया गया है, जो पारंपरिक रूढ़िवादी नीतियों या विभाजित सरकार की स्थापित सीमाओं से बंधे नहीं हैं। इसके चलते बुनियादी ढांचे पर खर्च, संरक्षणवादी व्यापार नीति और घरेलू विनिर्माण की रक्षा के लिए सरकारी हस्तक्षेप जैसे मुद्दों पर डेमोक्रेटों के साथ अलग-अलग समझौते संभव बताए गए हैं। बुनियादी ढांचे से जुड़ा कानून कांग्रेस के जिलों में लाखों डॉलर पहुंचा सकता है।
साथ ही, लेख के अनुसार ट्रंप कांग्रेस को दरकिनार करने के लिए कार्यकारी आदेश, आपातकालीन घोषणाओं और संघीय कानूनों की व्यापक व्याख्या का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच अधिकारों की सीमा को लेकर विवाद बढ़ सकता है।
ईरान को तत्काल विदेश नीति का संभावित प्रमुख टकराव-बिंदु बताया गया है। विश्लेषण के मुताबिक, 1973 के War Powers Resolution को लेकर संवैधानिक विवाद उभर सकता है। कांग्रेस तेहरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई सीमित करने या उसके लिए धन रोकने की कोशिश कर सकती है।
ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति की विदेश नीति संबंधी शक्तियों और सैन्य कार्रवाई पर कांग्रेस के अधिकार को लेकर मामला संघीय अदालतों तक पहुंचने की संभावना बताई गई है।
डेमोक्रेटिक समिति अध्यक्ष ट्रंप के मंत्रिमंडल और विदेश नीति से जुड़े फैसलों पर समन जारी कर जांच शुरू कर सकते हैं। विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि प्रतिनिधि सभा महाभियोग के अनुच्छेद तैयार कर सकती है।
हालांकि राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए सीनेट में दो-तिहाई बहुमत जरूरी है। इसलिए महाभियोग की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बावजूद वास्तविक रूप से पद से हटाए जाने की संभावना कम बताई गई है। लेख का निष्कर्ष है कि संवैधानिक संस्थाओं की सीमाओं की कड़ी परीक्षा हो सकती है, लेकिन अमेरिकी संवैधानिक व्यवस्था कायम रहेगी।